101+ Bhagat Singh Quotes in Hindi

Last Updated on August 27, 2021

Here is the Best Collection of The Great Bhagat Singh Quotes In Hindi and saying in Hindi, Motivational and Inspirational Thoughts and anmol vachan by Bhagat Singh.

देश के लिए मर मिटने वाले देशभक्त मै भगत सिंह का नाम भुलाया नहीं जा सकता। देश के प्रति उनके प्रेम ,दीवानगी और मर मिटने का भाव , उनके शेर -ओ शायरी और कविताये मैं साफ दिखाई देता है , जो आज भी यवाओं मैं आज भी जोश भरने का काम करता है।

जा मिला वह उस मिट्टी में  , जिसका वह लाल था
उस लाल के आगे खुशियों का अंबार था

“जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, 
दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं

इश्क तो इनका भी बेमिसाल था
बस इनकी मेहबूबा आजादी थी|
शहीद दिवस पर मां भारती के तीन
पुत्र को शत् शत् नमन
इन्कलाब जिंदाबाद
वन्दे मातरम् 

लड़ा वह अंत तक मातृभूमि की खातिर
क्योंकि मातृभूमि का सम्मान तार-तार था। । 

इस कदर वाकिफ है मेरी ,
कलम मेरे जज्बातों से ,
अगर मैं इश्क लिखना भी चाहूं ,
तो इंकलाब लिख जाता हूं। ।

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तन की मोहब्बत में, खुद को तपाये बैठे हैं,
मरेंगे वतन के लिए, शर्त मौत से लगाये बैठे हैं

सूर्य विश्व में हर किसी देश पर उज्ज्वल हो कर गुजरता है परन्तु उस समय ऐसा 
कोई देश नहीं होगा जो भारत देश के सामान इतना स्वतंत्र, 
इतना खुशहाल, इतना प्यारा हो।” ~ 
भगत सिंह

अगर बहरों को सुनाना है
तो आवाज जोरदार होनी चाहिए। । 

मरने के बाद भी जिसके नाम मे जान हैं,
ऐसे जाबाज़ शहीद हमारे भारत की शान है
देश के उन वीर जवानों को सलाम
जय हिन्द

“देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।“
 ~ भगत सिंह

जिंदगी तो अपने दम पर ही जी जाती है
दूसरों के कंधों पर तो , सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं। ।

सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से,
ये घटती-बढ़ती रहती हैं वीरों की शमशीरों से.

“प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं।“ 
~ भगत सिंह


वो इश्क का आलम भी गजब रहा होगा …
राझाँ” जिसमे भगतसिंह” और
“हीर” जिसमे “आज़ादी” रही होगी…

व्यक्तियों को कुचलकर ,
वे विचारों को नहीं मार सकते। ।

“जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है,
 दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।“
~ भगत सिंह

राख का हर एक कण
मेरी गर्मी से गतिमान है
मैं एक ऐसा पागल हूं
जो जेल में भी आजाद है।

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जशन आज़ादी का मुबारक हो
देश वालो को, फंदे से मोहब्बत थी
हम वतन के मतवालो को।
देश के शहीदो को नमन।

“यह एक काल्पनिक आदर्श है कि आप 
किसी भी कीमत पर अपने बल का प्रयोग नहीं करते, 
नया आन्दोलन जो हमारे देश में आरम्भ हुआ है और जिसकी 
शुरुवात की हम चेतावनी दे चुके हैं
 वह गुरुगोविंद सिंह और शिवाजी महाराज, 
कमल पाशा और राजा खान, वाशिंगटन और गैरीबाल्डी, 
लाफयेत्टे और लेनिन के आदर्शों से प्रेरित है।”
~ भगत सिंह

हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली
ये मुस्ते खाक है फानी रहे ,रहे न रहे। ।

मैं जला हुआ राख नही, अमर दीप हूँ,
जो मिट गया वतन पर, मैं वो शहीद हूँ।

सीने पर जो जख्म है , वह सब फूलों के गुच्छे हैं
हमें पागल ही रहने दो , हम पागल ही अच्छे हैं। ।

मनुष्य/इन्सान तभी कुछ करता है जब उसे अपने कार्य का उचित होना सुनिश्चित होता है,
 जैसा की हम विधान सभा में बम गिराते समय थे।
 जो मनुष्य इस शब्द का उपयोग या दुरुपयोग करते हैं उनके लाभ 
के हिसाब के अनुसार इसे अलग-अलग अर्थ और व्याख्या दिए जाते हैं।”

किसी भी कानून की पवित्रता  , तब तक बनी रहती है
जब तक वह लोगों के  , अधिकारों का हनन न करे। ।

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मर मिटनेवालों का बाकी यही निशां होगा

राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। 
मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।“

जशन आज़ादी का मुबारक हो देश वालो को,
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
जय हिन्द जय भारत

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सरफरोशी की तमन्ना , अब हमारे दिल में है
देखना है जोर कितना , बाजु-ए-कातिल में है। । 

सेवा ही करनी है तो निस्वार्थ भाव से करो
 क्या कोई अपनी माता से मूल्य मांगता है। ।

पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही गुलामी की}
मानसिकता को मैं और नहीं सह सकता
इस निष्क्रियता की भावना को त्याग कर
में क्रांति की भावना में बदल बदल दूंगा । ।

“यदि बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा।
जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं थ।
हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था ।
अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिये।”

वादे जो किए थे जो तुमने क्या उसे निभाते हो
फिर बोलो किस मुंह से मेरा जन्मदिन मनाते हो। ।

स्वतंत्रता प्रत्येक मानव का अधिकार है  
हम इसे छीन कर लेंगे यही मेरा प्रण है। ।

किसी को ‘क्रांति’ शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए।
लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,

मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,

मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा। जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे 
के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।”

लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा।


क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य अधिकार है
स्वतंत्रता सभी का एक
कभी ना खत्म होने वाला जन्मसिद्ध अधिकार है
श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है। ।

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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा, अमर शहीद भगत सिंह,
सुखदेव व राजगुरु के बलिदान दिवस पर, कोटि-कोटि नमन

कोई भी व्यक्ति जो जीवन में आगे बढ़ने के
लिए तैयार खड़ा हो उसे हर एक रूढ़िवादी
चीज की आलोचना करनी होगी, 
उसमे अविश्वास करना होगा और चुनौती भी देना होगा।” 

इतनी सी बात हवाओ को बताए रखना
रोशनी होगी चिरागों को जलाए रखना
लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने
ऐसे तिरंगे को हमेशा अपने दिल में बसाए रखना

चलो फिर से आज वो नजारा याद कर ले
शहीदों के दिल में थी जो ज्वाला वो याद कर ले
जिसमे बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पे
देशभक्तों के खून की वो धरा याद कर ले

यदि बहरों को सुनना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा.
जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मरना नही था.
हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था.
अंग्रेजी को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आजाद करना चाहिये – 

जिन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती है….
दुसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं

किसी भी इंसान को मारना आसान है, 
परन्तु उसके विचारों को नहीं।
महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं,
 जबकि उनके विचार बच जाते हैं।”~ 

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मातृभूमि के प्रति शहीद भगत सिंह का प्यार,
त्याग और समर्पण असाधारण व वंदनीय था।
भगत सिंह के सर्वोच्च बलिदान से युवाओं में
राष्ट्रभक्ति का ऐसा ज्वार आया जिससे पूरे देश
में स्वाधीनता की लहर और प्रचंड हो गयी।

जरूरी नहीं थी की क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो.
यह बस और पिस्तौल का पंथ नहीं था|

आम तौर पर लोग जैसी चीजें हैं उसके आदी हो जाते हैं 
और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। 
हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत है।”

किसी को “क्रांति” शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नही करनी चाहिए.
जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरुपयोग करते हैं उनके
फायदे के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।

जो भी व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है,
उसे हर एक रुढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी,
उसमें अविश्वास करना होगा, तथा उसे चुनौती देनी होगी।।

 जो व्यक्ति भी विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रुढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी,
उसमे अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनोती देनी होगी।

मैं इस बात पर जोर देता हूँ की मैं महत्वाकांक्षा,
आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ.
पर मैं जरूरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ,
और वही सच्चा बलिदान हैं।

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अहिंसा को आत्म-बल के सिद्धांत का समर्थन प्राप्त है जिसमे अंतत:
प्रतिद्वंदी पर जीत की आशा में कष्ट सहा जाता है ।
लेकिन तब क्या हो जब ये प्रयास अपना लक्ष्य प्राप्त करने में असफल हो जाएं ?
 तभी हमें आत्म -बल को शारीरिक बल से जोड़ने की ज़रुरत पड़ती है ताकि हम अत्याचारी और
क्रूर दुश्मन के रहमोकरम पर ना निर्भर करें ।” ~ भगत सिंह

किसी भी कीमत पर बल का प्रयोग ना करना काल्पनिक आदर्श है
और नया आन्दोलन जो देश में शुरू हुआ है और
जिसके आरम्भ की हम चेतावनी दे चुके हैं वो गुरु गोबिंद सिंह और
शिवाजी, कमाल पाशा और राजा खान, वांशिगटन और
गैरीबाल्डी, लाफायेतटे और लेनिन के आदर्शो से प्रेरित हैं

भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने
वाले स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह जी
की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।

“कभी वो दिन भी आएगा
कि जब आज़ाद हम होंगें
ये अपनी ही ज़मीं होगी
ये अपना आसमाँ होगा”

राख का हर एक कण,
मेरी गर्मी से गतिमान है।
मैं एक ऐसा पागल हूं,
जो जेल में भी आजाद है।।

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आम तोर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और
बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं.
हमें इसी निष्क्रियता भी भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत है 

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है ,
 जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे।”

“क़ानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है
जब तक की वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।”

क्रांति मानव जाती का एक अपरिहार्य अधिकार है. स्वतंत्रता सभी का एक
कभी न खत्म होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है
. श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है।

“निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार
ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम् लक्षण हैं।”

मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को
प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।

किसी ने सच ही कहा है, सुधार बूढ़े आदमी नहीं कर सकते ।
ते तो बहुत ही बुद्धिमान और समझदार होते हैं ।
सुधार तो होते हैं युवकों के परिश्रम, साहस, बलिदान और निष्ठा से,
 जिनको भयभीत होना आता ही नहीं और जो विचार कम और अनुभव अधिक करते हैं ।”~

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।।

अगर खुद को सिद्ध करने से पहले मुझे मौत आ गई,
तो सबसे पहले मौत को मौत के घाट उतार दूंगा!
मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर
करोड़ों देशवासियों की हृदय में आजादी की
अलख जगाने वाले महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम
भगत सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन

“इंकलाब जिंदाबाद”
राष्ट्रीय सेवा में हंसते-हंसते अपनी जान न्योछावर
करने वाले महान देशभक्त शहीद-ए-आजम
भगत सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन!

देश को विदेशी दासता से स्वतंत्र कराने हेतु
अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अमर क्रांतिकारी
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनके
बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन

सैकड़ो परिंदे आसमान पर आज नज़र आने लगे,
शहीदो ने दिखाई है राह उन्हें आजादी से उड़ने की।
देश के शहीदो को नमन।

लड़े वो वीर जवानों की तरह
ठंडा खून भी फौलाद हुआ
मरते-मरते भी कई मार गिराए
तभी तो देश आजाद हुआ
शहीद दिवस पर शहीदों को शत् शत् नमन

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महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद
भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को
शहीदी दिवस पर विनम्र नमन


जशन आज़ादी का मुबारक हो देश वालो को,
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
जय हिन्द जय भारत


मेरे जज्बातों से मेरा कलम इस कदर वाकिफ हो जाता हैं,
मैं इश्क भी लिखना चाहूँ तो इन्कलाब लिखा जाता हैं.
जय हिन्द

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