81+ Gulzar Shayari in Hindi

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So enjoy the Gulzar Sahab Shayari In Hindi.

Gulzar Shayari in hindi 2 lines

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई,जैसे एहसान उतारता है कोई

लकीरें हैं तो रहने दो, किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खींच दी थी, उन्ही को अब बनाओ पाला, और आओ कबड्डी खेलते हैं।।

सामने आए मेरे, देखा मुझे, बात भी की,मुस्कुराए भी, पुरानी किसी पहचान की ख़ातिर, कल का अख़बार था, बस देख लिया, रख भी दिया।।

देर से गूँजतें हैं सन्नाटे,  जैसे हम को पुकारता है कोई
हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं, वो मेरे शहर में आये भी और मिले भी नहीं।।

ये कैसा रिश्ता हुआ इश्क में वफ़ा का भला, तमाम उम्र में दो चार छ: गिले भी नहीं

फिर वहीं लौट के जाना होगा,यार ने कैसी रिहाई दी है

कई जरिये है कुछ कहने के,
उनमें से एक जरिया है
कुछ न कहना।

जाने वाले को जाने दीजिये,
आज रुक भी गया तो
कल चला जाएगा।

सीखा दिया वक्त ने मुझे
अपनों पे भी शक करना,
वरना फितरत थी गैरों पर भी
भरोसा करने की।

उम्र गुज़र गयी पर
कोई तुमसा नहीं मिला,
लोग यूँ ही कहते हैं कि
खोजने से खुदा भी मिलता है….

वफ़ा की उम्मीद
न करो उन लोगो से,
जो मिल सकते है किसी और से,
होते है किसी और के…

इस दिल का कहा मनो एक काम कर दो,एक बे-नाम सी मोहब्बत मेरे नाम करदो
मेरी ज़ात पर फ़क़त इतना अहसान कर दो,किसी दिन सुबह को मिलो, और शाम कर दो।।

Gulzar Shayari on life in hindi

उधड़ी सी किसी फ़िल्म का एक सीन थी बारिश,इस बार मिली मुझसे तो ग़मगीन थी बारिश
कुछ लोगों ने रंग लूट लिए शहर में इस के,जंगल से जो निकली थी वो रंगीन थी बारिश।।

वो भी डरा ही नहीं
मुझे खोने से,
वो क्या अफ़सोस करेगा
मेरे न होने से |

वो जो कहते थे कि
वक़्त ही वक़्त है तुम्हारे लिए,
आज कहते है तुम्हारे सिवा
और भी काम होते है…

मैं ही गलत था शायद
आखिर था भी मेरा पहला प्यार,
वो सही ही होगी,
उसे पहले भी हुआ था कई बार |

मुझे छोड़ने कि
वजह तो बता देते,
मुझसे नाराज़ थे या
मुझ हैसे हज़ार थे |

” यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता. “

” ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है.”

 काई सी जम गई है आँखों पर
सारा मंज़र हरा सा रहता है.”

शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है.
दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

 कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की.”

 वक़्त भी हार जाते हैं कई बार ज़ज्बातों से,
कितना भी लिखो, कुछ न कुछ बाकि रह जाता है.”

 महफ़िल में गले मिलकर वह धीरे से कह गए,
यह दुनिया की रस्म है, इसे मुहोब्बत मत समझ लेना.”

” तकलीफ खुद ही कम हो गई,
जब अपनों से उम्मीदें कम हो गई.”

” आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है
जो भी छिपा रखा है मन में लूटा देने का मन है.”

इतना क्यों सिखायेजा रही है ज़िन्दगीहमें कौन सी सदियाँगुज़ारनी है यहाँ

मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,​बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका।

मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।

Gulzar Shayari on dosti

थोड़ा सा रफू करके देखिए नाफिर से नई सी लगेगीजिंदगी ही तो है

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने मेंएक पुराना ख़त खोला अनजाने में

 मैन चुप करता हूँ हर शब् उमड़ती बारिश को

मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है ।”

“दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई. “

मैं वो क्यों बनु जो तुम्हें चाहिएतुम्हें वो कबूल क्यों नहींजो मैं हूं

कुछ जख्मों की उम्र नहीं होती हैं,ताउम्र साथ चलते हैं,जिस्मों के ख़ाक होने तक !

“कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद.”

सुनो…जब कभी देख लुं तुमकोतो मुझे महसूस होता है किदुनिया खूबसूरत है

सहम सी गयी हैख्वाइशेज़रूरतों ने शायद उन सेऊँची आवाज़ में बात की होगी

“पलक से पानी गिरा है,
तो उसको गिरने दो
कोई पुरानी तमन्ना,
पिंघल रही होगी!!”

फिर वहीं लौट के जाना होगा,यार ने कैसी रिहाई दी है।

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है

मेरा हक़ नहीं है तुम पर,
ये जानता हु में,
फिर भी न जाने क्यों,
दुआओ में तुझको मांगना अच्छा लगता हे.

सालो बाद मिले वो,
गले लगकर रोने लगे,
जाते वक्त जिसने कहा था,
तुम्हारे जैसे हजार मिलेंगे.

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

ये सोचकर की वो,
खिड़की से झाँक ले,
उसके गली के बच्चे,
आपस में लड़ा दिए मेने.

Gulzar Shayari on smile

कान में छेद है पैदायशी आया होगा
तूने मन्नत के लिये कान छिदाया होगा
सामने दाँतों का वक़्फा है  तेरे भी होगा
एक चक्कर तेरे पाँव  के तले भी होगा

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं

वो शिकायते जो बया नहीं होती
एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं

कैसे करें हम ख़ुद को
तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं,
तो तुम शर्ते बदल देते हो

एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा

उसी का ईमाँ बदल गया है
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था
वो एक दिन एक अजनबी को
मैंरी कहानी सुना रहा था

किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,
इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं।

कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें।

तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं।

हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते

समेट लो इन नाजुक पलो को
ना जाने ये लम्हे हो ना हो
हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल
उन पलो में हम हो ना हो

Gulzar Shayari on relationship

ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की… और कहना कि
कफ़न की ख्वाहिश में मेरी लाश
उनके आँचल का इंतज़ार करती है

बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है

लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार तुम्हारा है!
तुम झूठ को सच लिख दो, अख़बार तुम्हारा है!!

इस दौर में फरियादी, जाएं तो जाएं कहां,
सरकार भी तुम्हारी है, दरबार तुम्हारा है!!

खाली डिब्बा है फ़क़त, खोला हुआ चीरा हुआ
यूँ ही दीवारों से भिड़ता हुआ, टकराता हुआ
बेवजह सड़कों पे बिखरा हुआ, फैलाया हुआ
ठोकरें खाता हुआ खाली लुढ़कता डिब्बा

जब उसने किसी और को अपना लिया.
हमने भी उसके इश्क़ को अपने दिल में दफ़ना लिया.

मै तो खुद से भी अजनबी हूँ
मुझे गैर कहने वाले तेरी बात में दम है|

कोई शहर ख्यालों सा, ढूंढता हूं|
एक शख्स आईने सा, ढूंढता हूं||
तुम आसमानी, फरिश्ते की बात करते हो|
मैं रिश्तो में, वफा ढूंढता हूं||

Gulzar Shayari love in hindi

वक्त रहता नहीं कही भी टिक कर,
आदत इसकी भी इंसान जैसी हैं
दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं

एक वक़्त के बाद हर कोई गैर हो जाता है,
उम्रभर किसी को अपना समझना बस वहम है…!!!

दौर नहीं रहा अब किसी से वफ़ा करने का,
हद से ज्यादा प्यार करो तो लोग मतलबी समझने लगते है…!!!

ना जाने क्यो रेत की तरह निकल जाते है हाथों से वो लोग,
जिन्हें जिंदगी समझकर हम कभी खोना नहीं चाहते…!!!

तेरी यादों से भरी है,
मेरे दिल की तिजोरी,
कोई कोहिनूर भी दे तो में सौदा ना करू…!!!

अकेले खुश हु अब मैं परेशान मत कर, इश्क़ है तो इश्क़ कर एहसान मत कर!!!

उनकी मोहब्बत को कुछ इस तरह से निभाते है हम,
वो नहीं है तक़दीर में फिर भी उसे बेपनाह चाहते है हम..!!!

यकीन तो सबको झूठ पर ही होता है,
सच को तो अक्सर साबित करना पड़ता है…!!!

कुछ सुनसान पड़ी है ज़िंदगी, कुछ वीरान हो गए है हम,

जो हमें ठीक से जान भी नहीं पाया, खामखां उसके लिए परेशान हो गए है हम!!!!!

शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है.

दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,
बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका…!!!

उसको भी हमसे मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं, इश्क़ ही इश्क़ की कीमत हो जरुरी तो नहीं!!

हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते…!!!

Gulzar Shayari on mohabbat

यूँ तो रौनकें गुलज़ार थी महफ़िल, उस रोज़ हसीं चहरों से…
जाने कैसे उस पर्दानशी की मासूमियत पर हमारी धड़कने आ गई!!

कौन कहता है की हम झूंठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत तो पछ के देखिये जनाब!!

धागे बड़े कमजोर चुन लेते हैं हम,
और फिर पूरी उम्र गांठ बंधने में ही निकल जाती है !!

तजुर्बा बता रहा हूँ ऐ दोस्त…दर्द, गम, डर जो भी हो बस तेरे अन्दर है
खुद के बनाए पिंजरे से निकल कर तो देख, तू भी एक सिकंदर है!!

आदतन तुमने कर दीए वादे, आदतन हमने एतबार किया..
तेरी राहों में बारहाँ रुक कर, हमने अपना ही इंतज़ार किया!
अब ना मांगेंगे ज़िन्दगी या रब,
यह गुनाह हमने जो एक बार किया!!

थोडा है थोड़े की ज़रूरत है,
ज़िन्दगी फिर भी यहाँ की खुबसूरत है!!

सिर्फ एक दफ़ाह पलटकर उसने,बीती बातों की दुहाई दी है,

फिर वहीं लौट के जाना होगा,यार ने कैसी रिहाई दी है!!

पलक से पानी गिरा है, तो उसको गिरने दो,

कोई पुरानी तमन्ना, पिंघल रही होगी!!

दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है,

किस की आहट सुनता हूँ वीराने में!!

~ बड़ी हसरत है पूरा एक दिन इक बार मैं   अपने लिए रख लूं,   तुम्हारे साथ पूरा एक दिन   बस खर्च करने की तमन्ना है ।

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