104+ Sharabi Shayari | हिंदी शराबी शायरी 2022

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The word “Shayari” in India is a term used for a form of poetry that usually has no rhyming pattern and can be read as prose or verse. The meaning of this form of poetry is to express romantic love, sorrow, joy, or any other human emotion. It’s said that the origin of the word Shayari comes from Arabic and Persian language words which mean “to speak”.

sharabi shayari 2 lines

मिलावट है तेरे इश्क मेंइत्र और शराब की,
कभी हम महक जाते हैंकभी हम बहक जाते हैं |

मत कर हंगामा पीकर हमारी गली में,
हम तो खुद बदनाम है तेरी मोहब्बत के नशे में!

मत पूछ उसके मैखाने का पता ऐ साकी,
उसके शहर का तो पानी भी नशा देता है.|

पिलाने वाले कुछ तो पिला दिया होता,
शराब कम थी तो पानी मिला दिया होता!

निकलूं अगर मयखाने से तो
शराबी ना समझना दोस्त,
मंदिर से निकलता..
हर शख्स भी तो भक्त नहीं होता !|

आए थे हँसते खेलते मय-ख़ाने में ‘फ़िराक़’जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए |

तुम्हारी आँखों की तौहीन है, ज़रा सोचोतुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है |

लोग कहते हैं पिये बैठा हूँ मैं,
खुद को मदहोश किये बैठा हूँ मैं,
जान बाकी है वो भी ले लीजिये,
दिल तो पहले ही दिये बैठा हूँ मैं

लोग कहते हैं पिये बैठा हूँ मैं,
खुद को मदहोश किये बैठा हूँ मैं,
जान बाकी है वो भी ले लीजिये,
दिल तो पहले ही दिये बैठा हूँ मैं।

हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर,
वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर,
कल वो कह गये भुला दो हुमको,
हमने पुछा कैसे..
वो चले गये हाथो मे जाम देकर! ? ?

sharabi Shayari attitude

मुझ तक कब उनकी बज़्म में आता था दौर-ए-जामसाक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में.|

वो भी दिन थे जब हम भी पिया करते थे,

यूँ न करो हमसे पीने पिलाने की बात,

जितनी तुम्हारे जाम में है शराब,

उतनी हम पैमाने में छोड़ दिया करते थे।

हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराबआई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया. |

ना दूर हमसे जाया करो, दिल तड़प जाता है,
आपके ख्यालों में ही हमारा दिन गुज़र जाता है,
पूछता है यह दिल एक सवाल आपसे,
कि क्या दूर रहकर भी आपको हमारा ख्याल आता है!! ?

मत पूछ उसके मैखाने का पता ऐ साकी,

उसके शहर का तो पानी भी नशा देता है.|

मंजिल उन्हीं को मिलती है,
जिनके हौसलों में जान होती है…
और बंद भट्ठी में भी दारू उन्हीं को मिलती है,
जिनकी भट्ठी में पहचान होती है! ? ?

उनकी आंखें यह कहती रहती हैंलोग नाहक शराब पीते हैं.|

देखूँगा कभी ऐ शऱाब, तुझे अपने लबों से लगाकर,

तू मुझमे बसेगी, कि मैं तुझमें बसूँगा।

तुम्हें जो सोचें तो होता है कैफ़-सा तारी,तुम्हारा ज़िक्र भी जामे-शराब जैसा है. |

नशा हम करते हैं,
इलज़ाम शराब को दिया जाता है,
मगर इल्ज़ाम शराब का नहीं उनका है,
जिनका चेहरा हमें हर जाम में नज़र आता है!

कहते है शराब शरीर को ख़तम करती,
शराब सोच समझ को ख़तम करती है,
आओ आज इस शराब को ख़तम करते है,
एक वोतल तुम ख़तम करो एक हम ख़तम करते है! ?

मैं तोड़ लेता अगर वो गुलाब होती!

मैं जवाब बनता अगर वो सवाल होती!

सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता

,फिर भी पी लेता अगर वो शराब होती!

नतीजा बेवजह महफिल से उठवाने का क्या होगा,

न होंगे हम तो साकी तेरे मैखाने का क्या होगा।

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ,
सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ,
जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश,
मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ।

तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है!

खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है!

फिर आवाज़ लगायी जाती हैआ जाओ दर्दे दिलवालों!

यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है!

देखूँगा कभी ऐ शऱाब, तुझे अपने लबों से लगाकर,

तू मुझमे बसेगी, कि मैं तुझमें बसूँगा।

मदहोश कर देता है तेरे ये देखने का अंदाज़और लोग सोचते हैं कि हम पीते बहुत है |

sharabi shayari 140

Madhhosh hum hardam raha karte hain,
Aur ilzaam sharaab ko diya karte hain,
Kasoor sharaab ka nahi unka hai yaron,
Jinka chehra hum har jaam mein talaash kiya karte hain.

मयखाने की इज्ज़त का सवाल था हुज़ूर,

सामने से गुजरे तो, थोड़ा सा लड़खड़ा दिए।

थोड़ी सी पी शराब थोड़ी उछाल दी,कुछ इस तरह से हमने जवानी निकाल दी!

उसने हाथो से छू कर दरिया के पानी को गुलाबी कर दिया,

हमारी बात तो और थी उसने मछलियों को भी शराबी कर दिया |

Pee ke raat ko hum unko bhulane lage,
Sharab mein gham ko milane lage,
Daru bhi bewafa nikali yaron,
Nashe mein to woh aur bhi yaad aane lage.

मैं तोड़ लेता अगर वो गुलाब होती!मैं जवाब बनता अगर वो सवाल होती!

सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता,फिर भी पी लेता अगर वो शराब होती!

एक शराब की बोतल दबोच रखी है, तुझे भुलाने की तरकीब सोच रखी है।

पीते थे शराब हम;उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर;महफ़िल में गए थे हम;

यारों ने पिलाई उसकी कसम देकर।

ये ना पूछ मैं शराबी क्यूँ हुआ, बस यूँ समझ ले, गमों के बोझ से, नशे की बोतल सस्ती लगी।

यह शायरी लिखना उनका काम नहीं;जिनके दिल आँखों में बसा करते हैं;

शायरी तो वो शख्श लिखता है;

जो शराब से नहीं कलम से नशा करता है।

शिकन न डाल जबीं पर शराब देते हुए,

यह मुस्कराती हुई चीज मुस्करा के पिला,

Raat chup hai magar chand khamosh nahi,
Kaise kahoon aaj phir hosh nahi,
Is tarah dooba hoon teri mohabbat ki gahrai mein,
Hath mein jaam hai aur peena ka hosh nahi.

सरूर चीज के मिकदार में नहीं मौकूफ,

शराब कम है साकी तो नजर मिला के पिला।

जनून नहीं इश्क़ और महोब्बत का,
फिर भी खोया खोया रहता हूँ,
वो जबसे खुदा हुई,
हर शाम में पता हूँ,

broken heart sharabi shayari

आती हैं जब भी हिचकियाँ अब, शराब मैं पी लेता हूँ….

अब तो वो वहम भी छोड़ दिया है,

कि कोई मुझे भी याद करता है…..

 रात गुम सी  है मगर चैन खामोश नही,कैसे कह दूँ  आज फिर होश नही,

ऐसा डूबा तेरी आँखों की गहराई में ,

हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही

छलकते होठो से छू के, होठो को उन्होंने प्याला बना डाला,

पास आयी कुछ वो ऐसे, जिन्दगी को उन्होंने मधुशाला बना डाला।

ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचलनशा शराब में होता तो नाचती बोतल⁠⁠⁠⁠ |

Juda jab se wo hui,
Ghut Ghut kar jita hun,
Or, se liy
Har shaam me shrab pita leta hun,

शराब पीने से काफ़िर हुआ मैं क्यूं,

क्या डेढ़ चुल्लू पानी में ईमान बह गया ||

के आज तो शराब ने भी अपना रंग दिखा दिया,

दो दुश्मनो को गले से लगवा, दोस्त बनवा दिया |

लगता है बारिश भी मैखाने जाकर आती है, कभी गिरती,

कभी संभालती, तो कभी लड़खड़ा कर आती है |

पी के रात को हम उनको भुलाने लगे;शराब मे ग़म को मिलाने लगे;

ये शराब भी बेवफा निकली यारो;

नशे मे तो वो और भी याद आने लगे।

Pene ka shonk nahi fir bhi pee leta hun,
Uski bewafai ko bhulane ko,
Har sham,
Do jaam le leta hun,

जुदा जब से वो हुई,
घुट घुट कर जीता हूँ,
और, इस लिये
हर शाम में शराब पीता लेता हूँ,

sharabi shayari funny

मेरी तबाही का इल्जाम अब शराब पर है, करता भी क्या और तुम पर जो आ रही थी बात।

हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर दोस्तों,

की पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं।

ये तो देखा कि मिरे हाथ में पैमाना हैये न देखा कि ग़म-ए-इश्क़ को समझाना है |

कुछ सही तो कुछ खराब कहते हैं;लोग हमें बिगड़ा हुआ नवाब कहते हैं;

हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर;

कि पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं।

लोग अच्छी ही चीजों को यहाँ ख़राब कहते हैं,

दवा है हज़ार ग़मों की उसे शराब कहते हैं।

फिर ना पीने की कसम खा लूँगा;साथ जीने की कसम खा लूँगा;

एक बार अपनी आँखों से पिला दे साकी;

शराफत से जीने की कसम खा लूँगा।

दुःख इतना मिला कि हम घबरा कर पी गए

ख़ुशी अगर थोड़ी सी भी मिली तो उसे मिलाकर पी गए,

यूं तो ना थी हमें शराब पीने कि आदत,

पर शराब को तनहा देखा तो तरस खाकर पी गए |

पीने का शौंक नहीं फिर भी पी लेता हूँ,
उसकी बेवफाई को भुलाने को,
हर शाम,
दो जाम ले लेता हूँ,

Sharabhi Quotes In Hindi

आप अपने नशे में जीते है .

हम जरा सी शराब पीते है |

फिर ना पीने की कसम खा लूँगा;साथ जीने की कसम खा लूँगा;

एक बार अपनी आँखों से पिला दे साकी

शराफत से जीने की कसम खा लूँगा।

कुछ नशा तो आपकी बात का है;कुछ नशा तो धीमी बरसात का है;

हमें आप यूँ ही शराबी ना कहिये

;इस दिल पर असर तो आप से मुलाकात का है।

छलक जाने दो पैमाने मैखाने भी क्या याद रखेंगे, आया था कोई दिवाना अपनी मोहब्बत को भुलाने

पीता हूं गम भुलाने को,
फिर भी गम साथ नहीं छोड़ते,

शराब और मेरा कई बार ब्रेकअप हो चुका है;

पर कमबख्त हर बार मुझे मना लेती है |

पीते थे शराब हम उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर,

महफ़िल में आये तो यारों ने पिला दी उसकी कसम देकर।

बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;

मजा तो तब है पीने का यारो;इधर हम पियें और नशा उनको आये।

Ajj ji bhar ke pii lene de,
Sare gm ko bhul jane de,
Jab tak me hosh naa kho dun,
Tu aaj mujhe pii lene de,

हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;

वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;कल वो कह गए भुला दो हमको;

यूँ बिगड़ी बहकी बातों का कोई शौक़ नही है मुझको,

वो पुरानी शराब के जैसी है असर सर से उतरता ही नहीं।

हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।नशा मोहब्बत का हो
या शराब का होश दोनों में खो जाते हैफर्क सिर्फ इतना है

की शराब सुला देती हैऔर मोहब्बत रुला देती है |

SHARABI SHAYARI WITH IMAGES

Nasha nahi es jam me utna,
Jitni unki ankhon me hai,
Duba hun un ankhon me es kadar,
Mujhe khud ka hosh nahi hai,

यूँ ही बदनाम कर दिया है दुनियावालों ने मयखानों को,

जो नशा शबाब में होता है वो शराब में कहाँ।

फिर इश्क़ का जूनून चढ़ रहा है सिर पे,

मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे |

महफ़िल – ऐ -इश्क सजाओ तो कोई बात बने दौलत-ऐ -इश्क लुटाओ

तो कोई बात बनेजाम हाथों से नहीं है पीना मुझको कभीआँखों से पिलाओ तो कोई बात बने |

आज जी भर के पी लेने दे,
सारे गम को भूल जाने दे,
जब तक मे होश ना खो दूँ,
तू आज मुझे पी लेने दे,

शराबी स्टेटस हिंदी

न जख्म भरे, न शराब सहारा हुई न वो वापस लौटी न मोहब्बत दोबारा हुई।

तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है!खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है!

फिर आवाज़ लगायी जाती हैआ जाओ दर्दे दिलवालों!

यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है!

नशा नहीं इस जाम में उतना,
जितनी उनकी आँखों में है,
डूबा हूँ उन आँखों में इस कदर, |

दारू शायरी फनी

एक पल में ले गई मेरे सारे ग़म खरीद कर,

कितनी अमीर होती है ये बोतल शराब की।

मैं तोड़ लेता अगर वो गुलाब होती!मैं जवाब बनता अगर वो सवाल होती!

सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता,

फिर भी पी लेता अगर वो शराब होती!

थोड़ी सी पी शराब थोड़ी सी उछाल दी,

कुछ इस तरह से हमने जवानी निकाल दी।

निगाहे-मस्त से मुझको पिलाये जा साकी, हसीं निगाह भी जामे-शराब होती है।

निगाहे-मस्त से मुझको पिलाये जा साकी,

हसीं निगाह भी जामे-शराब होती है।

पीते थे शराब हम;उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर;महफ़िल में गए थे हम;

यारों ने पिलाई उसकी कसम देकर।

यह शायरी लिखना उनका काम नहीं;जिनके दिल आँखों में बसा करते हैं;

शायरी तो वो शख्श लिखता है;जो शराब से नहीं कलम से नशा करता है।

सुना है मोहब्बत कर ली तुमने भी, अब किधर मिलोगे,

पागलखाने या मैखाने |

मौसम में बहार ना होती,
तुम जो ना होती,
में आज होश में ना होता,
तेरा साथ जो ना होता,

Sharabi Shayari on Attitude in Hindi | Bewda Shayari

ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचलनशा शराब में होता तो नाचती बोतल⁠⁠⁠⁠ |

तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली बादाखाने की,

तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते।

रात गुम सी  है मगर चैन खामोश नही,कैसे कह दूँ  आज फिर होश नही,ऐसा डूबा तेरी आँखों की गहराई में ,

हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही |

आज अंगूर की बेटी से मोहब्बत कर लेशेख साहब की नसीहत से

बगावत कर लेइसकी बेटी ने उठा रखी है सर पर दुनियाये तो अच्छा हुआ अंगूर को बेटा न हुआ |

फिर इश्क़ का जूनून चढ़ रहा है सिर पे|

मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे |

हर जाम पी गया मैं, ऐ दर्दे-जिंदगानी फिर भी बड़ा तरसा हूं,

कुछ और शराब दे दो |

मगर दे दिया मैख़ाना जहा बहुत सारी शराब थी

एक कन्धा माँगा था जिसका मुझे सहारा मिले |

तुम हसीन हो गुलाब जैसी हो

बहुत नाजुक हो ख्वाब जैसी हो |

पी के रात को हम उनको भुलाने लगे;शराब मे ग़म को मिलाने लगे;

ये शराब भी बेवफा निकली यारो;नशे मे तो वो और भी याद आने लगे।

तू होश में थी फिर भी हमें पहचान ना पायी,

एक हम है कि पीकर भी तेरा नाम लेते रहे.|

ये तो देखा कि मिरे हाथ में पैमाना हैये न देखा कि ग़म-ए-इश्क़ को समझाना है |

दिल की धड़कन में आग लगाती हो

होठों से लगाकर पी जाऊँ तुम्हे सर से पांव तक शराब जैसी हो |

शराब शरीर को खत्म करती है
शराब समाज को ख़तम करती है
आओ आज इस शराब को खत्म करते हैं
एक बॉटल तुम खत्म करो एक बॉटल हम खत्म करते है |

शराबी शायरी इन हिंदी विथ इमेजेज

लोग कहते हैं पिये बैठा हूँ मैं
खुद को मदहोश किये बैठा हूँ मैं
जान बाकी है वो भी ले लीजिये
दिल तो पहले ही दिये बैठा हूँ मैं |

कुछ सही तो कुछ खराब कहते हैं;

लोग हमें बिगड़ा हुआ नवाब कहते हैं;

हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर;

कि पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं।

कहते हैं पीने वाले मर जाते हैं जवानी में, हमने तो बुजुर्गों को जवान होते देखा है मैखाने में।

कभी आंसू कभी ख़ुशी देखी हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी |

कभी मौक़ा लगे, कड़वे दो घूँट चख लेना ज़रा तेरे लिये शराब छोड़ आए हैं. |

खरीदा जा नहीं सकता है साक़ी ज़र्फ़ रिंदों का, बहुत शीशे पिघलते हैं तो एक पैमाना बनता है।

शायरी वो नही लिखते हैं जो शराब से नशा करते हैं शायरी तो वो लिखते हैं जो यादों से नशा करते हैं

कुछ तो शराफत सीख ले इश्क शराब से |

नशा तब दोगुना होता है जनाब, जब जाम भी छलके और आँख भी छलके।

फिर ना पीने की कसम खा लूँगा;साथ जीने की कसम खा लूँगा;

एक बार अपनी आँखों से पिला दे साकी;

शराफत से जीने की कसम खा लूँगा।

शराब और मेरा कई बार ब्रेकअप हो चुका है;

पर कमबख्त हर बार मुझे मना लेती है |

कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई,

आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई।

कुछ नशा तो आपकी बात का है;कुछ नशा तो धीमी बरसात का है;

हमें आप यूँ ही शराबी ना कहिये;

इस दिल पर असर तो आप से मुलाकात का है।

खुशियों से नाराज है मेरी जिंदगीप्यार की मोहताज़ है मेरी

जिंदगीहंस लेता हूँ लोगो को दिखाने के लिएवरना दर्द की किताब है मेरी जिंदगी

बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;

मजा तो तब है पीने का यारो;

इधर हम पियें और नशा उनको आये।

पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी,

डगमगाना भी ज़रूरी है संभलने के लिए |

हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;

वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;

कल वो कह गए भुला दो हमको;

गिरी मिली एक बोतल शराब की, तो ऐसा लगा मुझे

जैसे बिखरा पड़ा हो सुकून, किसी के एक रात का.

उसने हर नशा सामने लाकर रख दिया
और कहा सबसे बुरी लत कौनसी हैं
मैने कहा तेरे प्यार की |

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ,

सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ,

जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश,

मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ।

मैकदे लाख बंद करें जमाने वाले, शहर में कम नहीं आंखों से पिलाने वाले।

अगर ग़म मोहब्बत पे हाबी न होता,

खुदा की कसम मैं शराबी न होता।

तन्हाई में भी कहते है लोग जरा महफ़िल में जिया करो
पैमाना लेके बिठा देते है मैखाने में और कहते है जरा तुम कम पिया करो |

नशा मोहब्बत का हो या शराब काहोश दोनों में खो जाते हैफर्क सिर्फ इतना है की शराब सुला देती हैऔर मोहब्बत रुला देती है |

मुझे ऐसी#शराब बता ऐ #दोस्त #नशा ए #इश्क #उतार #पाऊँ मै

हो चुकी मुलाकात अभी सलाम बाकी है

तुम्हारे नाम की दो घूँट शराब बाकी है |


हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।नशा मोहब्बत का हो या शराब का होश दोनों में खो जाते हैफर्क सिर्फ इतना है की शराब सुला देती हैऔर मोहब्बत रुला देती है |

कौन आता है मयखाने में पीने को ये शराब साकी,

हम तो तेरे हुस्न का दीदार किया करते हैं।

महफ़िल – ऐ -इश्क सजाओ तो कोई बात बने दौलत-ऐ -इश्क लुटाओ तो कोई बात बनेजाम हाथों से नहीं है पीना मुझको कभीआँखों से पिलाओ तो कोई बात बने |

शराब शरीर को खत्म करती है शराब समाज को ख़तम करती है

आओ आज इस शराब को खत्म करते हैं एक बॉटल तुम खत्म करो एक बॉटल हम खत्म करते है |

शराबी बनकर खुश हो लेता हूँ,हर जाम से दर्द भर लेता हूँ,

एक बेवफा का नशा तो मुझे हर पल रहता है,

इस शराब से थोड़ा होश संभाल लेता हूँ

कहो सनम से मुझे और पीने दे,यारों थोड़ा अपने लिए भी जी लेता हूँ…

तुमको मुबारक हो खुशियों का शामियाना

मेरे नसीब में अभी दो गज ज़मीन बाकी है |

रात चुप है मगर चाँद खामोश नही
कैसे कहूँ आज फिर होश नही
इस तरह डूबा हूँ तेरी मोहब्बत की गहराई में
हाथ में जाम है और पीना का होश नही |

मिलावट है तेरे इश्क मेंइत्र और शराब कीकभी हम महक जाते हैंकभी हम बहक जाते हैं |

रोक दो मेरे जनाज़े को जालिमों,मुझमें जान आ गयी है,

पीछे मुड़के देखो कमीनो,दारू की दुकान आ गयी है…

पीके रात को हम उनको भुलाने लगे,शराब में गम को मिलाने लगे,

दारू भी बेवफा निकली यारों,

नशे में तो वो और भी याद आने लगे…

चारों तरफ तन्हाई का साया है,ज़िन्दगी में प्यार किसने पाया है,

हम यादों में झूमते हैं उनकी,और ज़माना कहता है आज फिर पीकर आया है…

हम लाख अच्छे सही लोग ख़राब कहते है

बिगड़ा हुआ वो हमको नवाब कहते है

हम तो ऐसे ही बदनाम हो गए है

की पानी भी पीये तो लोग शराब कहते है |

दूसरों के लिए ख़राब ही सही,

हमारे लिए तो ज़िन्दगी बन जाती है,

सौ ग़मों को निचोड़ने के बाद ही,

एक कतरा शाराब बन जाती है…

यादों से सलाम लेता हूँ,वक्त के हाथ थाम लेता हूँ,ज़िन्दगी थम जाती है पल भर के लिए,जब हाथों में शराब-ए-जाम लेता हूँ…

दिल के दर्द से बड़ा कोई दर्द नहीं होता,आशिकों का शराब के सिवा कोई हमदर्द नहीं होता,जब दिल टूटता है तो आँसू उनके भी निकलते हैं,जो कहते हैं कि

“मर्द को दर्द नहीं होता..”

मैं तोड़ लेता अगर वो गुलाब होती!मैं जवाब बनता अगर वो सवाल होती!

सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता,फिर भी पी लेता अगर वो शराब होती!

तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है!खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है!
फिर आवाज़ लगायी जाती हैआ जाओ दर्दे दिलवालों!

यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है!

 मैं तोड़ लेता अगर वो गुलाब होती!मैं जवाब बनता अगर वो सवाल होती!

सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता,

फिर भी पी लेता अगर वो शराब होती!

मत पूछ उसके मैखाने का पता ऐ साकीउसके शहर का तो पानी भी नशा देता है

 ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचलनशा शराब में होता तो नाचती बोतल⁠⁠⁠⁠

बड़ी गौर से देख रहा हु इस मैखाने को

इसने वक़्त ही नहीं दिया सर झुकाने को

मुझे मरने से डर नही लगता ऐ उम्र

बस शर्म सी आ रही है उसके पास जाने को |

पीते थे शराब हम;उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर;महफ़िल में गए थे हम;यारों ने पिलाई उसकी कसम देकर |

रात गुम सी है मगर चैन खामोश नही,

कैसे कह दूँ आज फिर होश नही,

ऐसा डूबा तेरी आँखों की गहराई में ,

हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही |

तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है!

खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है!

फिर आवाज़ लगायी जाती हैआ जाओ दर्दे दिलवालों!

यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है!

मैं तोड़ लेता अगर वो गुलाब होती!

मैं जवाब बनता अगर वो सवाल होती!

सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता

फिर भी पी लेता अगर वो शराब होती!

शराबी शायरीआज अंगूर की बेटी से मोहब्बत कर लेशेख साहब की नसीहत से बगावत कर लेइसकी बेटी ने उठा रखी है सर पर दुनियाये तो अच्छा हुआ अंगूर को बेटा न हुआ

पी के रात को हम उनको भुलाने लगे;शराब मे ग़म को मिलाने लगे;

ये शराब भी बेवफा निकली यारो;

नशे मे तो वो और भी याद आने लगे।

फिर ना पीने की कसम खा लूँगा;साथ जीने की कसम खा लूँगा;

एक बार अपनी आँखों से पिला दे साकी;

शराफत से जीने की कसम खा लूँगा।

 कुछ नशा तो आपकी बात का है;कुछ नशा तो धीमी बरसात का है;

हमें आप यूँ ही शराबी ना कहिये;इस दिल पर असर तो आप से मुलाकात का है।

कभी यारो की महफ़िल मे बैठ के हम भी पिया करते थे
कभी यारो के यार बन के हम भी जिया करते थे
ज़िंदगी ने की बेवफाई वरना
हम भी ज़िंदगी से प्यार किया करते थे |

बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;

मजा तो तब है पीने का यारो;इधर हम पियें और नशा उनको आये।

हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।नशा मोहब्बत का हो या शराब का होश दोनों में खो जाते हैफर्क सिर्फ इतना है की शराब सुला देती हैऔर मोहब्बत रुला देती है |

महफ़िल – ऐ -इश्क सजाओ तो कोई बात बनेदौलत-ऐ -इश्क लुटाओ तो कोई बात बनेजाम हाथों से नहीं है पीना मुझको कभीआँखों से पिलाओ तो कोई बात बने |

मदहोश हम हरदम रहा करते हैं,और इल्ज़ाम शराब को दिया करते हैं

,कसूर शराब का नहीं उनका है यारों,जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं!!

उम्मीद नहीं है फिर भी जिए जा रहा हूँ,खाली है बोतल फिर भी पिए जा रहा हूँ,

पता नहीं वो मिलेंगे या नहीं,इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए पिए जा रहा हूँ!!

रात चुप है मगर चाँद खामोश नहीं,कैसे कहूँ आज की फिर होश नही,इस तरह डूबा हूँ तेरी मोहब्बत की गहराई में,हाथ में जाम है और पिने का होश नहीं!!

बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये,के वो आज नजरों से अपनी पिलाये,मजा तो तब ही आये पीने का यारो,शराब हम पियें और नशा उनको हो जाए!!

रात क्या हुयी रौशनी को भूल गये,चाँद क्या निकला सूरज को भूल गये,

माना कुछ देर हमने आपको SMS नही किया,तो क्या आप हमे याद करना भूल गये. |

गम इस कदर मिला की घबरा के पी गये
खुशी थोड़ी सी मिली तो मिला के पी गये
यूँ तो ना थी जनम से पीने की आदत
शराब को तन्हा देखा तो तरस खा के पी गये
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