Poems on Peacock In Hindi | मोर पर कविता

8 Best Poems on Peacock In Hindi | मोर पर कविता

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These Peacock Gindi Poems मोर पर कविता are written by Famous Hindi Poets. So please share these Poems on peacock in Hindi.

Best Peacock Poems In Hindi | मोर पर कविता

  1. मोर | दीनदयाल शर्मा | Peacock Rhymes Lyrics in Hindi
  2. मोर | श्रीधर पाठक | 30 lines on Peacock in Hindi
  3. मोर का पंख | रमेश तैलंग | Hindi Poem on Peacock for class 3
  4. मोर धन नांगर बइला | नूतन प्रसाद शर्मा
  5. मोर न होगा …उल्लू होंगे | नागार्जुन
  6. मोर छत्तीसगढ़ के कोरा | रमेशकुमार सिंह चौहान
  7. मोर से | बालकृष्ण गर्ग | मोर वर कविता
  8. मोर के चंदन मोर बन्यौ दिन दूलह हे अली | रसखान | पक्षी पर छोटी कविता

1.मोर | दीनदयाल शर्मा | Peacock Rhymes Lyrics in Hindi

आसमान में बादल छाए
गड़-गड़-गड़-गड़ करते शोर
अपने पंखों को फैलाए
घूम-घूम कर नाचे मोर ।

सजी है सुन्दर कलंगी सिर पर
आँखें कजरारी चित्तचोर
रिमझिम-रिमझिम बरखा बरसे
सबके मन को भाता मोर ।

पँखों में रंगीला चँदा
पिकोक पिको बोले पुरज़ोर
बरखा जब हो जाए बन्द तो
नाचना बन्द कर देता मोर ।।

2.मोर | श्रीधर पाठक | 30 lines on Peacock in Hindi

अहो सलोने मोर, पंख अति सुंदर तेरे,
रँगित चंदा लगे गोल अनमोल घनेरे।
हरा, सुनहला, चटकीला, नीला रंग सोहे,
रेशम के सम मृदुल बुनावट मन को मोहे।
सिर पर सुघर किरीट नील कल-कंठ सुहावे,
पंख उठाकर नाच, तेरा अति जी को भावे।
‘के का’ करके विदित श्रवण प्रिय तेरी बानी,
जरा सुना तो सही वही हमको रस सानी।
बादल जब दल बाँध गगन तल पर घिर आवै,
स्याम घटा की छटा सकल थल पर छा जावे
तब तू हो मदमत्त मेघ को नृत्य दिखावे
अति प्रमोद मन आन हर्ष के अश्रु बहावे
ऐसा अपना नाच दिखा हमको भी प्यारे
जिसे देख रे मोर! मोद मन होय हमारे।

3.मोर का पंख | रमेश तैलंग | Hindi Poem on Peacock for class 3

बीचों-बीच किताब के
मैंने रखा सँभाल के
एक मोर का पंख
सुनो जी, एक मोर का पंख।

जिसको एक सहेली ने
मुझे दिया था प्यार से।
एक मोर पंख
सुनो जी, एक मोर का पंख।

मखमल-सा कोमल-कोमल
लगे छुओ जब हाथ से।
एक मोर का पंख
सुनो जी, एक मोर का पंख।

पप्पी देती हूँ उसको
रोज सवेरे याद से।
एक मोर का पंख
सुनो जी, एक मोर का पंख।

4.मोर धन नांगर बइला | नूतन प्रसाद शर्मा

का होगे मोर तीर मं नइये हीरा मोती सोना।
मोर तो धन हे नांगर बइला, डोरा – सुमेला- गोना।

हीरा पन्‍ना रत्‍न हा रहितिस, पर कुछु नइ आतिस काम।
बस आंखी मं देखत रहितेंव, हो जातिस सब नींद हराम।
चोरी हो जातिस त होतिस – जिनगी भर के रोना।
का होगे मोर तीर मं नइये हीरा मोती सोना।
मोर तो धन हे नांगर बइला, डोरा – सुमेला- गोना।

कोई भाई मदद मांगतिस, कर नइ पावेंव पर उपकार।
बस लालच मं मरते रहितेंव, इसने तज देतेव संसार।
कोई ला देवव नइ पातेंव – मिट्ठी बात के दोना
का होगे मोर तीर मं नइये हीरा मोती सोना।
मोर तो धन हे नांगर बइला, डोरा – सुमेला- गोना।

नांगर बइला साबर गाड़ा, इही मन धन पूंजी मोर।
इही मन हा जग ला पोंसत, तब तो प्रानी खूब सजोर।
जेहर सबके जीव बचाये, उही बीज ला बोना।
का होगे मोर तीर मं नइये हीरा मोती सोना।
मोर तो धन हे नांगर बइला, डोरा – सुमेला- गोना।

उंचहा किम्‍मत के वस्‍तू मन,होत किसनहा बर बेकार।
उही चीज हा आवश्‍यक हे – जेहर कर दे जग उद्धार।
स्‍वारथ मं नइ लागे तेला, फोकट काबर ढोना।
का होगे मोर तीर मं नइये हीरा मोती सोना।
मोर तो धन हे नांगर बइला, डोरा – सुमेला- गोना।

एक किसान अटक जाथे ते, दूसर मदद देवत साथ।
एकर बल्‍दा मूर बियाज ला, नइ मांगे लमिया के हाथ।
मंय राखे हंव तेला ले लव, समय अब नइ खोना।
का होगे मोर तीर मं नइये हीरा मोती सोना।
मोर तो धन हे नांगर बइला, डोरा – सुमेला- गोना।

5.मोर न होगा …उल्लू होंगे | नागार्जुन

ख़ूब तनी हो, ख़ूब अड़ी हो, ख़ूब लड़ी हो
प्रजातंत्र को कौन पूछता, तुम्हीं बड़ी हो

डर के मारे न्यायपालिका काँप गई है
वो बेचारी अगली गति-विधि भाँप गई है
देश बड़ा है, लोकतंत्र है सिक्का खोटा
तुम्हीं बड़ी हो, संविधान है तुम से छोटा

तुम से छोटा राष्ट्र हिन्द का, तुम्हीं बड़ी हो
खूब तनी हो,खूब अड़ी हो,खूब लड़ी हो

गांधी-नेहरू तुम से दोनों हुए उजागर
तुम्हें चाहते सारी दुनिया के नटनागर
रूस तुम्हें ताक़त देगा, अमरीका पैसा
तुम्हें पता है, किससे सौदा होगा कैसा

ब्रेझनेव के सिवा तुम्हारा नहीं सहारा
कौन सहेगा धौंस तुम्हारी, मान तुम्हारा
हल्दी. धनिया, मिर्च, प्याज सब तो लेती हो
याद करो औरों को तुम क्या-क्या देती हो

मौज, मज़ा, तिकड़म, खुदगर्जी, डाह, शरारत
बेईमानी, दगा, झूठ की चली तिजारत
मलका हो तुम ठगों-उचक्कों के गिरोह में
जिद्दी हो, बस, डूबी हो आकण्ठ मोह में

यह कमज़ोरी ही तुमको अब ले डूबेगी
आज नहीं तो कल सारी जनता ऊबेगी
लाभ-लोभ की पुतली हो, छलिया माई हो
मस्तानों की माँ हो, गुण्डों की धाई हो

सुदृढ़ प्रशासन का मतलब है प्रबल पिटाई
सुदृढ़ प्रशासन का मतलब है ‘इन्द्रा’ माई
बन्दूकें ही हुईं आज माध्यम शासन का
गोली ही पर्याय बन गई है राशन का

शिक्षा केन्द्र बनेंगे अब तो फौजी अड्डे
हुकुम चलाएँगे ताशों के तीन तिगड्डे
बेगम होगी, इर्द-गिर्द बस गूल्लू होंगे
मोर न होगा, हंस न होगा, उल्लू होंगे

6.मोर छत्तीसगढ़ के कोरा | रमेशकुमार सिंह चौहान

ऊजळी चारणी री
आतमा री कुळण
घुळगीरग ले बड़ सुंदर भुईंया, मोर छत्तीसगढ़ के कोरा।
दुनिया भर ऐला कहिथे, भैइया धान के कटोरा।।
मैं कहिथंव ये मोर महतारी ऐ
बड़ मयारू बड़ दुलौरिन
मोर बिपत के संगवारी ऐ
सहूंहे दाई कस पालय पोसय
जेखर मैं तो सरवन कस छोरा
संझा बिहनिया माथा नवांव ऐही देवी देवता मोरे
दानी हे बर दानी हे,दाई के अचरा के छोरे।।
मोर छत्तीसगढ़ी भाखा बोली
मन के बोली हिरदय के भाखा
हर बात म हसी ठिठोली
बड़ गुरतुर बड़ मिठास
घुरे जइसे सक्कर के बोरा
कोइला अऊ हीरा ला, दाई ढाके हे अपन अचरा
बनकठ्ठी दवई अड़बड़, ऐखर गोदी कांदी कचरा
अन्नपूर्णा के मूरत ये हा
धन धान्य बरसावय
श्रमवीर के माता जे हा
लइकामन ल सिरजावय
फिरे ओ तो कछोरा
सरग ले बड़ सुंदर भुईंया, मोर छत्तीसगढ़ के कोरा।
दुनिया भर ऐला कहिथे, भैइया धान के कटोरा।।ऊजळी चारणी री
आतमा री कुळण
घुळगी

7.मोर से | बालकृष्ण गर्ग | मोर वर कविता

 ‘मोर, बोलते हो तुम क्या-क्या-
पैको-पैको, केहाँ-केहाँ?’

-‘मैं तो वर्षा का दीवाना,
सिर्फ पुकारूँ- मे-आ,मे –आ!’

– ‘पंख और कलगी अति सुंदर,
रंग-बिरंगे मिले कहाँ पर?’

– ‘मिला मुझे कुदरत का प्यार,
पाए उससे ये उपहार ‘।

– कैसी खुशी, नहीं जो थकते,
खोल पंख, तुम खूब थिरकते?’

– ‘वन औ’ उपवन की सुंदरता-
देख, नाचते का मन करता’।

8.मोर के चंदन मोर बन्यौ दिन दूलह हे अली | रसखान | पक्षी पर छोटी कविता

मोर के चंदन मोर बन्यौ दिन दूलह हे अली नंद को नंद।
श्री कृषयानुसुता दुलही दिन जोरी बनी विधवा सुखकंदन।
आवै कहयो न कुछु रसखानि री दोऊ फंदे छवि प्रेम के फंदन।
जाहि बिलोकैं सबै सुख पावत ये ब्रज जीवन हैं दुख ढ़ंढन।

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