10 Poems on Sister in Hindi | बहन पर कविताएँ

Are you looking for the best Poems on Sister in Hindi? Then here we have the best collection of the poem on sister in Hindi.

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These Behen Bhai Poems are written by famous Hindi poets so please share this बहन पर कविताए

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Best Sister – Brother Poems in Hindi | Behan Bhai poem Hindi

  1. बहन की बिदाई | कमलेश्वर साहू | Poem for Sister from Brother in Hindi
  2. दीदी | रविकान्त | Hindi Poem on Sister Marriage
  3. बहन-भाई | रामदेव रघुबीर | Funny Poem for Sister in Hindi
  4. टेलीफोन पर बहन | हरप्रीत कौर | Short Poem on Brother and Sister Relationship in Hindi
  5. मेरी बहन | दो नैना मतवारे | Poems for My Sister
    in Hindi
  6. भाई-बहन | हरीशचन्द्र पाण्डे | Didi Poem in Hindi
  7. बहन का पत्र | नचिकेता | Birthday Poem for Sister in Hindi
  8. भाई – बहन | गोपाल सिंह नेपाली | Lines for Sister in Hindi
  9. बहन के घर | प्रेमरंजन अनिमेष | Behan Bhai Poem Hindi
  10. बहन | अखिलेश श्रीवास्तव | भाई के लिए कविता
  11. बहन | लालित्य ललित | Behan ka Pyar
  12. भाई बहन | व्योमेश शुक्ल
  13. बहन | मनीष मिश्र
  14. मेरी जिन्दगी बहन | बरीस पास्तेरनाक
  15. बहन का घर | प्रेमरंजन अनिमेष
  16. बहन | देवयानी
  17. मेरी बहन | ऐ कातिबे तक़दीर

बहन की बिदाई | कमलेश्वर साहू | Poem for Sister from Brother in Hindi

पिता के गुलशन का फूल
जिसे तोड़कर ले जा रहा है वह
हमारी अपनी मर्जी से
हम खुश हैं
रो रही हैं हमारी आखें
हम बिछड़ रहे हैं
और साथ हैं तुम्हारे
पास हैं तुम्हारे !

दीदी | रविकान्त | Hindi Poem on Sister Marriage

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नहीं बताएँगी दीदी
अपने पर गुजरी हुई बात
मन की बात
दीदी मन ही में रखेंगी, कुछ दिन
उसे पुरानी पड़ने देंगी वो

माँ नहीं हैं घर में
बहन दूसरी भी नहीं है यहाँ
यहाँ जैसे दीदी अकेले हैं एकदम,
जबकि
इस सन्नाटे के बावजूद
भरा-पूरा है घर
पिता हैं
भइया हैं
मैं हूँ!

कोई बात है
जिसे दीदी
केवल मुझी से बताएँगी कभी
क्योंकि मुझी से मिलेगा उन्हें बल
कहती हैं दीदी, और
दुःख से भीग-भीग जाता है उनका स्वर

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बहन-भाई | रामदेव रघुबीर | Funny Poem for Sister in Hindi

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राखी बहनो का त्योहार,
युग-युग और घटनों के प्यार।
भाई राखो इसे सँवार,
बहनो की रक्षा का है तुम पर भार॥

बहनें करतीं हर वर्ष याद,
सुबे से लेकर आधी रात।
पूर्णनिमा के पुन्यों को ले धागों में,
भाई दे आशीर्वाद,
जुग-जुग जियो, सुहागन रहो।
करो ईश्वर और पति भक्ति,
तुझे मिले लक्ष्मी की शक्ति॥

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टेलीफोन पर बहन | हरप्रीत कौर | Short Poem on Brother and Sister Relationship in Hindi

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कहती है
‘एक बात कह रही हूँ
घबराना मत
घर में तो सब ठीक है
पर हाँ किसी की तार, चिठ्ठी, टेलीफोन पा कर
डरना नहीं
एक उम्र के बाद तो
जाना ही है सबको
कोई पहले भी चला जाए
तो भी डरना नहीं
हौसला रखना
हाँ हो सके तो कुछ दिन
घर आ जाना
माँ कुछ उदास है बस’

प्रत्युतर में पूछता हूँ
‘माँ के नहीं रहने पर
तुम तो रहोगी न
मेरे पास ?’

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मेरी बहन | दो नैना मतवारे | Poems for My Sister in Hindi

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दो नैना मतवारे तिहारे – २, हम पर ज़ुल्म करे
दो नैना मतवारे तिहारे – २, हम पर ज़ुल्म करे
नैनों में रहे तो, सुध बुध खोये – २
छुपे तो चैन हरे

दो नैना मतवारे तिहारे – २, हम पर ज़ुल्म करे
तन तन के चलाए तीर, नस नस में उठाए पीर – २
मदभरे रसीले निठोर बड़े, न डरे न धर धरे
दो नैना मतवारे तिहारे – २, हम पर ज़ुल्म करे

जब होती हो तुम उस पार, नस नस में उठाए पीर – २
मन की बीना के बज उठते, जोर जोर से तार
दो नैना मतवारे तिहारे – २, हम पर ज़ुल्म करे

पास आए तो ऐसे भूल गए, पल ख्यन में सब कुछ भूल गए – २
खुशियों के सोते उबल पड़े, हर अंग तो रंग भरे
दो नैना मतवारे तिहारे – २, हम पर ज़ुल्म करे

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भाई-बहन | हरीशचन्द्र पाण्डे | Didi Poem in Hindi

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भाई की शादी में ये फुर्र-फुर्र नाचती बहनें
जैसे सारी कायनात फूलों से लद गई हो

हवा में तैर रही हैं हँसी की अनगिनत लड़ियाँ
केशर की क्यारियाँ महक रही हैं

याद आ गई वह बहन
जो होती तो सारी दिशाओं को नचाती अपने साथ

जिसका पता नहीं चला
गंगा समेत सारी गहराईयाँ छानने के बाद भी…

और बहन की शादी में यह भाई
भीतर-भीतर पुलकता
मगर मेंड़ पर संभलता, चलता-सा भी

कुछ-कुछ निर्भार
मगर बगल का फूल तोड़े जाने के बाद पत्ते-सा
श्रीहीन…।

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बहन का पत्र | नचिकेता | Birthday Poem for Sister in Hindi

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कुशल-क्षेम से
पिया-गेह में
बहन तुम्हारी है

सुबह
सास की झिड़की
वदन झिंझोड़ जगाती है
और ननद की
जली-कटी
नश्तरें चुभाती है
पूज्य ससुर की
आँखों की
बढ़ गयी खुमारी है

नहीं हाथ में
मेहंदी
झाडू, चूल्हा-चौका है
देवर रहा तलाश
निगल जाने का
मौका है
और जेठ की
जिह्वा पर भी रखी
दुधारी है

पति परमेश्वर
सिर्फ चाहता
खाना गोस्त गरम
और पड़ोसिन के घर
लेती है
अफवाह जनम
करमजली होती
शायद
दुखियारी नारी है

कई लाख लेकर भी
गया बनाया
दासी है
और लिखी
किस्मत में शायद
गहन उदासी है
नहीं सहूंगी-
अब दुख की भर गयी
तगारी है।

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भाई – बहन | गोपाल सिंह नेपाली | Lines for Sister in Hindi

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तू चिंगारी बनकर उड़ री, जाग-जाग मैं ज्वाल बनूँ,
तू बन जा हहराती गँगा, मैं झेलम बेहाल बनूँ,
आज बसन्ती चोला तेरा, मैं भी सज लूँ लाल बनूँ,
तू भगिनी बन क्रान्ति कराली, मैं भाई विकराल बनूँ,
यहाँ न कोई राधारानी, वृन्दावन, बंशीवाला,
…तू आँगन की ज्योति बहन री, मैं घर का पहरे वाला ।

बहन प्रेम का पुतला हूँ मैं, तू ममता की गोद बनी,
मेरा जीवन क्रीड़ा-कौतुक तू प्रत्यक्ष प्रमोद भरी,
मैं भाई फूलों में भूला, मेरी बहन विनोद बनी,
भाई की गति, मति भगिनी की दोनों मंगल-मोद बनी
यह अपराध कलंक सुशीले, सारे फूल जला देना ।
जननी की जंजीर बज रही, चल तबियत बहला देना ।

भाई एक लहर बन आया, बहन नदी की धारा है,
संगम है, गँगा उमड़ी है, डूबा कूल-किनारा है,
यह उन्माद, बहन को अपना भाई एक सहारा है,
यह अलमस्ती, एक बहन ही भाई का ध्रुवतारा है,
पागल घडी, बहन-भाई है, वह आज़ाद तराना है ।
मुसीबतों से, बलिदानों से, पत्थर को समझाना है ।

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बहन के घर | प्रेमरंजन अनिमेष | Behan Bhai Poem Hindi

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मैं तो हुई तबाह तबाह

कुछ भी करने देते हैं कब
हैं शैतान तीन-तीन
फिर भी कैसे-कैसे कर यह
कुछ मीठा कुछ-कुछ नमकीन

देखो बना रखा था आकर
तुम पाओगे
जाने लगा किस तरह मुझको
तुम आओगे

लाती बहन थाल में क्‍या-क्‍या
खाता खूब सराह सराह…

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बहन | अखिलेश श्रीवास्तव | भाई के लिए कविता

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जिस भोर बहन जन्मी घर में
दादा ने माँ के पुरखो को गालियाँ दी
दादी ने माँ के खानदान को
पिता ने माँ को
औऱ बिलखती माँ ने खुद को
सांझ होते-होते
लपेट लिये गये ईश्वर भी।
फिर भी बहन ने संस्कार सीखे
औऱ मैंने गालियाँ!

मैंने पहली बार सातवीं में प्रेम किया
दूसरी बार नौवीं मे
तीसरी बार गयारहवी मे
फिर काफी का कप बन गया प्रेम।
बहन ने सिर्फ़ एक बार किया प्रेम
सिर्फ एक बार लिया अपने ईश्वर का नाम
गला रेता गया रात के तीन बजे
तक जाकर सबेरे तक बच पायी इज्जत!

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बहन | लालित्य ललित | Behan ka Pyar

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बहन भाई को हर
मुश्किल से बचाती है
पिता की डांट से
मास्टर की फटकार से
तितली को भाई की
हथेली पर
कोमल भावना से
रख देती है
भाई, बहन के इस प्यार
को सहेज लेता है
ज़रूरत पड़ने पर बहन की
मदद करता है
मां-बाप, बहन-भाई के
प्यार पर मुग्ध हैं

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चौदह भाई बहन | व्योमेश शुक्ल

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झेंप से पहले परिचय की याद उसी दिन की

कुछ लोग मुझसे पूछे तुम कितने भई बहन हो

मैंने कभी गिना नहीं था गिनने लगा

अन्नू दीदी मीनू दीदी भानू भैया नीतू दीदी

आशू भैया मानू भैया चीनू दीदी

बचानू गोल्टी सुग्गू मज्जन

पिण्टू छोटू टोनी

तब इतने ही थे

मैं छोटा बोला चौदह

वे हँसे जान गये ममेरों मौसेरों को सगा मानने की मेरी निर्दोष गलती

इस तरह मुझे बताई गई

माँ के गर्भ और पिता के वीर्य की अनिवार्यता

और सगेपन की रूढ़ि

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बहन | मनीष मिश्र

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सच और सपनों के बीच फँदी
ढेर सारे शब्दों के ढेर से है ढँकी
उलीचती, बिखेरती अपनी पागल सी हँसी
अपने ही मौन से गहरी मुँदी
कैसी होगी मेरी बहन?
माँ की बीमारी में चिन्ता से घुली
पिता के विषाद से सहमी-डरी
अपने एकांत में वैसे ही हरी
कैसी होगी मेरी बहन?
अपने कपड़ों को बार-बार निरखती
अपने चेहरे को फिर-फिर परखती
कठिन समय में भी सहजता से सँवरती
जोड़ती, गाँठती, समेटती, बिखेरती
कैसी होगी मेरी बहन?
कैसी होगी मेरी बहन?
जिसके पास होगा
थिरकता सा मौन
ढेर सी प्रतीक्षाएँ
अपूजित देवता का विश्वास
सहेज कर रखे संस्कार
उधेड़े बुने रिश्तों की पोथी
और कभी न खत्म होने वाले
शब्दों का अटाला
कैसी होगी मेरी बहन।

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मेरी जिन्दगी बहन | बरीस पास्तेरनाक

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मेरी जिन्‍दगी बहन ने आज की बाढ़
और बहार की इस बारिश में
ठोकरें खाई हैं हर चीज से
लेकिन सजे-धजे दंभी लोग
बड़बड़ा रहे हैं जोर-जोर से
और डस रहे हैं एक विनम्रता के साथ
जई के खेतों में साँप।

बड़ों के पास अपने होते हैं तर्क
हमारी तर्क होते हैं उनके लिए हास्‍यास्‍पद
बारिश में बैंगनी आभा लिए होती हैं आँखें
क्षितिज से आती है महक भीगी सुरभिरूपा की।

मई के महीने में जब गाड़ियों की समय सारणी
पढ़ते हैं हम कामीशिन रेलवे स्‍टशेन से गुजरते हुए
यह समय सारणी होती है विराट
पावन ग्रंथों से भी कहीं अधिक विराट
भले ही बार-बार पढ़ना पड़ता है उसे आरंभ से।

ज्‍यों ही सूर्यास्‍त की किरणें
आलोकित करने लगती हैं गाँव की स्त्रियों को
पटड़ियों से सट कर खड़ी होती हैं वे
और तब लगता है यह कोई छोटा स्‍टेशन तो नहीं
और डूबता हुआ सूरज सांत्‍वना देने लगता है मुझे।

तीसरी घंटी बजते ही उसके स्‍वर
कहते हैं क्षमायाचना करते हुए :
खेद है, यह वह जगह है नहीं,
पर्दे के पीछे से झुलसती रात के आते हैं झोंके
तारों की ओर उठते पायदानों से
अपनी जगह आ बैठते हैं निर्जन स्‍तैपी।

झपकी लेते, आँखें मींचते मीठी नींद सो रहे हैं लोग,
मृगतृष्‍णा की तरह लेटी होती है प्रेमिका,
रेल के डिब्‍बों के किवाड़ों की तरह इस क्षण
धड़कता है हृदय स्‍तैपी से गुजरते हुए।

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बहन का घर | प्रेमरंजन अनिमेष

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रास्‍ते में पड़ता है
घर बहन का

पर गुज़र जाते
अकसर उधर से
इसी तरह
चुपचाप
मिले बिना
बगैर ख़बर किए

अपना
या दुनिया का
कोई काम देखते

बहनें हमारे रास्‍ते में
नहीं आतीं

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बहन | देवयानी

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एक बहन थी छोटी
उस वक्त की नीली आँखें याद आती हैं
ब्याह दी गई जल्दी ही
गौना नहीं हुआ था अभी
पति मर गया उसका

इक्कीसवीं सदी में
तेजी से विकासशील और परिवर्तनशील इस समाज में
ब्राह्मण की बेटी का नहीं होता दूसरा ब्याह
पिता, भाई, परिवार के रहम पर जीना था उसे

नियति के इस खेल को
बीते बारह सालों से झेल रही थी वह
अब मर गई

फाँसी पर झूलने के ठीक पहले
कौनसा विचार आया होगा उसके मन में आखिरी बार

क्या जीवन में कुछ भी ऐसा नहीं रहा था
जिसके मोह ने उसे रोक लिया होता

मात्र तीस साल की उम्र में
क्या ऐसा कोई भी सुख नहीं था
जिसे याद कर उसे
जीने की इच्छा हुई होती
फिर एक बार

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मेरी बहन | ऐ कातिबे तक़दीर

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ऐ कातिबे तक़दीर मुझे इतना बता दे,
क्यों मुझ से ख़फ़ा है तू
क्या मैंने किया है?

औरों को ख़ुशी मुझको फ़कत दर्दो रंजो ग़म
दुनिया को हँसी और मुझे रोना दिया है
क्या मैंने…

हिस्से में सबके आई हैं रंगीन बहारें
बदबख्तियाँ लेकिन मुझे शीशे में उतारें
पीते हैं लोग रोज़ो शब मुसर्रतों की मय
मैं हूँ कि सदा ख़ूने जिगर मैंने पिया है
क्या मैंने…

था जिनके दम क़दम से ये, आबाद आशियाँ
वो चहचहाती बुलबुलें जाने गईं कहाँ?
जुगनू की चमक है न सितारों की रोशनी!
इस घुप्प अंधेरे में है मेरी जान पर बनी।।
क्या थी खता कि जिसकी सज़ा, तूने मुझ को दी
क्या था गुनाह कि जिसका बदला मुझ से लिया है
क्या मैंने…

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